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Rashmi rathi, Dinkar ji, kavita sangrah

रामधारी सिंह दिनकर   रश्मिरथी दिनकर जी द्वारा रचित यह कविता रश्मिरथी के तृतीय सर्ग के भाग १ की पंगतियाँ है।  इस कविता में दिनकर जी ने पांडवो के अज्ञात वाश के पूर्ण होने तथा उनके अंदर धधकती ज्वाला का वर्णन कविता के माध्यम से किया है।।   हो गया पूर्ण अज्ञात वास, पाडंव लौटे वन से सहास, पावक में कनक-सदृश तप कर, वीरत्व लिए कुछ और प्रखर, नस-नस में तेज-प्रवाह लिये, कुछ और नया उत्साह लिये। सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है, शूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते, विघ्नों को गले लगाते हैं, काँटों में राह बनाते हैं। मुख से न कभी उफ कहते हैं, संकट का चरण न गहते हैं, जो आ पड़ता सब सहते हैं, उद्योग-निरत नित रहते हैं, शूलों का मूल नसाने को, बढ़ खुद विपत्ति पर छाने को। है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके वीर नर के मग में खम ठोंक ठेलता है जब नर, पर्वत के जाते पाँव उखड़। मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है। गुण बड़े एक से एक प्रखर, हैं छिपे मानवों के भीतर, मेंहदी में जैसे लाली हो, वर्तिका-बीच उजियाली हो। बत्ती जो नहीं जलाता है रोशनी नहीं वह पाता है। पीसा जात...

Bhasha ka swaroop

  भाषा का स्वरूप   भाषा के उस तत्व को स्वरूप कहते है जो सदैव विकसित होकर आगे बड़ता जाता है भाषा के विकसित रूप को ही भाषा का स्वरूप कहते है। मुख्यतः भाषा के 4 स्वरूप होते है।   बोली साहित्यक भाषा राजभाषा राष्ट्रभाषा  1 बोली  जिस भाषा के जन्म का कोई अता- पता न चले बल्कि सामान्य जनता अपनी सहूलियत के लिए इसे स्वयं गढ़ लेती है।  हमारे भारत मे 600 से अधिक और 700 से कम बोलियाँ विधमान है जैसे- भोजपुरी, बघेली, बुंदेली, मगही बोली को हम देशज कह सकते है।  2 साहित्यक भाषा साहित्यक भाषा को  व्याकरणिक भाषा भी कहा जाता है मानक भाषा, सुधरी भाषा, परिनिष्ठित भाषा   आदि सब इसी के अन्य नाम है  जिस भाषा स्वरूप बोली बिकसित होकर अपने आप को व्याकरण सम्मत बना ली हो तो ऐसी भाषा को साहित्यक भाषा कहते है जिस भाषा के अपने नियम व शर्ते हो और अपने व्याकरण के साथ - साथ कुछ न कुछ साहित्यक रचनाएँ हुई हो तो उसे साहित्यक भाषा कहते है। उदाहरण- बृजभाषा, अवधी, खड़ीबोली, आदि।  3 राजभाषा जिस भाषा मे किसी देश की सरकार द्वारा अपने काम काज शासन प्रशासन एक राज्य से दू...

Hindi ki up bhasha ur boliyaan/ हिन्दी भाषा और उसकी उपभाषाएँ एवं उसकी बोलियाँ

आज आप इस लेख मे हिन्दी भाषा और उसकी उपभाषा और बोलियों के बारे में जानकारी दी गई है तो इस लेख को अंत तक पड़े।  हिन्दी की उपभाषा और बोलियाँ हिन्दी भाषा के विकास का सफर बहुत बड़ा है हिन्दी का ये सफर संस्कृत- पाली- प्राकृत- अपभ्रंश से होते हुए आया है।संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी कहा जाता है हिन्दी की उपभाषाएँ कुछ इस प्रकार है।  अपभ्रंश - अपभ्रंश के ही उपनाम अवहट्ट, अविहथ्था, बिगड़ी हुई भाषा, भ्रष्ट आदि नाम है अपभ्रंश की ही कुछ उपभाषाएँ इस प्रकार है (500 ई•-1000 ई•)  शोरसेनी अपभ्रंश- पश्चिमी हिन्दी, गुजराती, राजस्थानी हिन्दी खस अपभ्रंश- पहाड़ी हिन्दी पैशाची - पञ्जाबी, लहदा ब्राचड अपभ्रंश- सिंधी महाराष्ट्री अपभ्रंश- मराठी अर्ध्द मागधी अपभ्रंश- पूर्वी हिन्दी मागधी अपभ्रंश- बांग्ला, असमिया, उड़िया, बिहारी हिन्दी।    इस प्रकार हिन्दी की 5 उपभाषाएँ शौरसेनीअपभ्रंश(पश्चिमी हिन्दी, राजस्थानी हिन्दी), खस अपभ्रंश(पहाड़ी हिन्दी), अर्ध्द मागधी अपभ्रंश(पूर्वी हिन्दी), मागधी अपभ्रंश (बिहारीहिन्दी) इनकी 18बोलियाँ कुछ इस प्रकार है- हमारे भारत मै 600 से अधिक और  700 से कम बोलिय...

Hindi bhasha ki vikas yatra, bharat ki raj bhasha

हिन्दी भाषा की विकास यात्रा एक भाषा के रूप मे हिन्दी भाषा की विकास यात्रा की बात करें तो यह एक लंबी प्रक्रिया है। एक भाषा के विकास मे उस समाज और संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है जहाँ पर ये बोली जाती है खासकर भारत के उत्तरी राज्यों की भूमिका प्राचीन भाषा संस्कृत रही है और इसी भाषा के विभिन्न काल खंडो मे अलग- अलग स्वरूपों मे हुए वियोजन से हिन्दी का विकास हुआ संस्कृत- वैदिक् संस्कृत- लौकिक संस्कृत- पाली- प्राकृत - अपभ्रंश.. । अपभ्रंश से ही हिन्दी की 5 उपभाषाएँ और 18 बोलियों निकली है।  भारत की राजभाषा/राष्ट्रभाषा   यदि राजभाषा और राष्ट्रभाषा के अन्तर की बात की जाए तो इनमें दो प्रमुख अंतर है एक अन्तर इन्हें बोलने वालो की संख्या से है और दूसरा इसके प्रयोग का है।  राष्ट्रभाषा - जहाँ राष्ट्रभाषा जनसाधारण की भाषा होती है और लोग इससे भावात्मक और सांस्कृतिक रूप से जुड़े होते है।  राजभाषा- राजभाषा का प्रयोग अक्सर सरकारी कार्यालयों और सरकारी कार्मिको द्वारा किया जाता है।  कुछ देश जैसे व्रिटेंन की इंग्लिश, जर्मनी की जर्मन और पाकिस्तान की उर्दू  राष्ट्रभाषा और राजभा...

Hindi bhasha ki utpatti

हिन्दी भाषा की उत्पत्ति भाषा की उत्पत्ति =  भाषा शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के भाष् (कहना)धातु से हुई है| * हिन्दी फारसी भाषा का शब्द है।  *  विश्व की सबसे प्राचीनतम् भाषा संस्कृत है।  *  मानव उत्पत्ति का प्रथम ग्रंथ " ऋग्वेद "है।  *  संस्कृत भाषा को भी दो भाग मे विभाजित किया गया है।  * वैदिक संस्कृत(1500ई•पू•-1000 ई•पू•)  * लोकिक संस्कृत(1000ई•पू•-500 ई•पू•)  * वैदिक संस्कृत मे ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद आदि लिखे गए।  *  लोकिक संस्कृत मे महाभारत, उपनिषद, वेदांग, आरण्यक, पुराण, उपवेद आदि लिखे गए।  हिन्दी भाषा की उत्पत्ति का क्रम कुछ इस प्रकार है ..  संस्कृत वैदिक संस्कृत लोकिक संस्कृत पाली प्राकृत अपभ्रंश अपभ्रंश से ही हिन्दी की अन्य उपभाषाओं की उत्पत्ति मानी जाती है जिसमें हिन्दी की 5 उपभाषाएँ और 18 बोलियाँ है।