हिन्दी भाषा की विकास यात्रा
एक भाषा के रूप मे हिन्दी भाषा की विकास यात्रा की बात करें तो यह एक लंबी प्रक्रिया है। एक भाषा के विकास मे उस समाज और संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है जहाँ पर ये बोली जाती है खासकर भारत के उत्तरी राज्यों की भूमिका प्राचीन भाषा संस्कृत रही है और इसी भाषा के विभिन्न काल खंडो मे अलग- अलग स्वरूपों मे हुए वियोजन से हिन्दी का विकास हुआ संस्कृत- वैदिक् संस्कृत- लौकिक संस्कृत- पाली- प्राकृत - अपभ्रंश.. । अपभ्रंश से ही हिन्दी की 5 उपभाषाएँ और 18 बोलियों निकली है।
भारत की राजभाषा/राष्ट्रभाषा
यदि राजभाषा और राष्ट्रभाषा के अन्तर की बात की जाए तो इनमें दो प्रमुख अंतर है एक अन्तर इन्हें बोलने वालो की संख्या से है और दूसरा इसके प्रयोग का है।
राष्ट्रभाषा- जहाँ राष्ट्रभाषा जनसाधारण की भाषा होती है और लोग इससे भावात्मक और सांस्कृतिक रूप से जुड़े होते है।
राजभाषा- राजभाषा का प्रयोग अक्सर सरकारी कार्यालयों और सरकारी कार्मिको द्वारा किया जाता है।
कुछ देश जैसे व्रिटेंन की इंग्लिश, जर्मनी की जर्मन और पाकिस्तान की उर्दू राष्ट्रभाषा और राजभाषा एक ही है परन्त बहुभाषी देशों के साथ यह समस्या है और हमारा भारत बहुभाषी देशों मे से ही एक है। भारत सरकार ने 14 सितंबर 1947 को हिन्दी को राजभाषा के रूप मे अपनाया (अनु•343)।
1953 से 14सितंबर को हिन्दी दिवस मनाया जाने लगा। विश्व मे हिन्दी तीसरे स्थान पर बोली जाने वाली भाषा है।

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