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Bhasha ka swaroop

  भाषा का स्वरूप   भाषा के उस तत्व को स्वरूप कहते है जो सदैव विकसित होकर आगे बड़ता जाता है भाषा के विकसित रूप को ही भाषा का स्वरूप कहते है। मुख्यतः भाषा के 4 स्वरूप होते है।   बोली साहित्यक भाषा राजभाषा राष्ट्रभाषा  1 बोली  जिस भाषा के जन्म का कोई अता- पता न चले बल्कि सामान्य जनता अपनी सहूलियत के लिए इसे स्वयं गढ़ लेती है।  हमारे भारत मे 600 से अधिक और 700 से कम बोलियाँ विधमान है जैसे- भोजपुरी, बघेली, बुंदेली, मगही बोली को हम देशज कह सकते है।  2 साहित्यक भाषा साहित्यक भाषा को  व्याकरणिक भाषा भी कहा जाता है मानक भाषा, सुधरी भाषा, परिनिष्ठित भाषा   आदि सब इसी के अन्य नाम है  जिस भाषा स्वरूप बोली बिकसित होकर अपने आप को व्याकरण सम्मत बना ली हो तो ऐसी भाषा को साहित्यक भाषा कहते है जिस भाषा के अपने नियम व शर्ते हो और अपने व्याकरण के साथ - साथ कुछ न कुछ साहित्यक रचनाएँ हुई हो तो उसे साहित्यक भाषा कहते है। उदाहरण- बृजभाषा, अवधी, खड़ीबोली, आदि।  3 राजभाषा जिस भाषा मे किसी देश की सरकार द्वारा अपने काम काज शासन प्रशासन एक राज्य से दू...