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वर्ण विभाग- हिन्दी वर्ण, वर्णमाला, परिभाषा, भेद और उदाहरण Varn vibhaag, hindi varnmaala

 आज के इस लेख में हमने वर्ण(varn) से सम्बंधित जानकारी प्रदान की है। अगर आप वर्ण से सम्बंधित जानकारी चाहते है तो शुरू से लेकर अंत तक इस लेख को पूरा पड़े। 

हिन्दी वर्ण परिभाषा

भाषा की सबसे छोटी इकाई वर्ण अथवा ध्वनि कहलाती है, जबकि भाषा की सबसे छोटी सार्थक इकाई वाक्य कहलाती है। भाषा शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के ‘बोलना’ शब्द से हुई है।

वर्ण की परिभाषा को एक पंक्ति मे व्यक्त करें तो देवनागरी लिपि के अनुसार लिखित ध्वनि संकेतों को वर्ण कहते है। 

वर्णमाला, परिभाषा, भेद और उदाहरण Varn vibhaag, hindi varnmaala


वर्णमाला Varnmala

सार्थक एवं स्वतंत्र उच्चारित ध्वनि संकेतों को वर्ण कहते है हिन्दी में वर्णो की संख्या 52 है जिसमे 

11 स्वर - अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ

25 वर्गीय व्यंजन - क, ख, ग, घ, ङ, च, छ, ज, झ, ञ, ट, ठ, ड, ढ,ण,प, फ, ब, भ, म, न

4 अंतस्थ व्यंजन - य, र ,ल, व

4 उष्म व्यंजन- स, श, ष, ह

4 संयुक्त व्यंजन- क्ष, त्र, ज्ञ, श्र

अयोगवाह- अं, अ:

2 उछिप्त/द्विगुण- ढ़, ड़

इस प्रकार कुल 52वर्ण है जो दो प्रकार के है

1 स्वर

2 व्यंजन

स्वर

स्वर उन ध्वनियों को कहते है जो बिना किसी अन्य वर्णो की सहायता के उच्चारित किये जाते हैं। 

स्वरो का वर्गीकरण

  1. उच्चारण के आधार पर
  2. उच्चारण समय के आधार पर
  3. जिव्हा स्थान के आधार पर
  4. मुहॅ के आकार के आधार पर
  5. ओठ के आकार के आधार पर

1 उच्चारण के आधार पर स्वर


तीन प्रकार के होते है जो निम्न हैं-

1. हृस्व स्वर - 

मूल स्वर वे स्वर जिनके उच्चारण में कम-से-कम समय लगता है, अर्थात् जिनके उच्चारण में अन्य स्वरों की सहायता नहीं लेनी पड़ती है, मूल स्वर
या ह्रस्व स्वर कहलाते हैं;

जैसे—
अ, इ, उ, ऋ।

2.  दीर्घ स्वर -

 वे स्वर जो सजातीय स्वरों (एक ही स्थान से बोले जाने वाले स्वर) के संयोग से निर्मित हुए हैं, दीर्घ स्वर कहलाते हैं;

जैस-
अ + अ = आ
इ + इ = ई
उ + उ = ऊ

3 संयुक्त स्वर - 

वे स्वर जो विजातीय स्वरों (विभिन्न स्थानों से बोले जाने वाले स्वर) के संयोग से निर्मित हुए हैं, संयुक्त स्वर कहलाते हैं;

जैसे-
अ + इ = ए
अ + ए = ऐ
अ + उ = ओ
अ+ओ = औ


2 उच्चारण समय के आधार पर

1 हृस्व स्वर
2 दीर्घ स्वर
3 प्लुट स्वर

1 हृस्व स्वर- 

जिन वर्णो/स्वरो का उच्चारण कम से कम समय मे हो उसे हृस्व स्वर कहते है-  अ, इ, उ, ऋ । 

2 दीर्घ स्वर-

जिन वर्णो/स्वारो का उच्चारण हृस्व स्वर से दो गुने समय मे हो उसे दीर्घ स्वर कहते हैं - आ,  ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ ।

3. प्लुत स्वर - 

वे स्वर जिनके उच्चारण में दीर्घ स्वर से भी अधिक समय लगता है, प्लुत स्वर कहलाते हैं; जैसे- ‘इ’ किसी को पुकारने या नाटक के संवादों में इसका प्रयोग करते हैं; जैसे - राऽऽऽऽम । 

3 - जिव्हा स्थान के आधार पर

1 अग्र स्वर - जिन स्वरो का उच्चारण जिव्हा के अगले भाग से हो उसे  अग्र स्वर कहते है। जैसे- इ, ई, ए, ऐ

2 मध्य स्वर - जिन स्वरो का उच्चारण जिव्हा के मध्य भाग से हो उसे मध्य स्वर कहते है। जैसे-  अ

3 पश्च स्वर - जिन स्वरो का उच्चारण जिव्हा के / मुख के पिछले भाग से हो तो उसे पश्च स्वर कहते है। जैसे - आ, उ, ऊ, ओ, औ,

4 - मुहॅ के आकार के आधार पर - 

1 - वृत्ताकार स्वर - जिन वर्णो का उच्चारण करते वक्त मुह का आकार गोलाकार हो जाए उसे वृत्ताकार स्वर कहते है - उ, ऊ, ओ, औ।। 

2 - अवृत्ताकार स्वर - जिन वर्णो का उच्चारण करते वक्त मुह का आकार गोलाकार न हो उसे अवृत्ताकार स्वर कहते है। - अ, आ, इ, ई, ए, ऐ, ऋ  ।

5 - ओठ के आकार के आधार पर


1- संवृत स्वर - इ, ई, उ, ऊ

2 - विवृत् स्वर - अ, आ, ए, ऐ, ओ, औ।। 
वर्ण विभाग- हिन्दी वर्ण, वर्णमाला, परिभाषा, भेद और उदाहरण Varn vibhaag, hindi varnmaala


व्यंजन
• जिन वर्णो का उच्चारण स्वरों की सहायता के बिना नहीं हो पाता है ,उन्हें व्यंजन वर्ण (Hindi Vyanjan) कहते है। 
जैसे – क (क्+अ)

• प्रत्येक व्यञ्जन अ से मिलकर उच्चारित होता है।
•हिंदी Varnmala में कोई भी व्यंजन बिना ‘अ’ स्वर के उच्चरित नहीं होता है।
व्यंजन दो तरह से लिखे जाते हैं :

 • खड़ी पाई के साथ
क ख ग घ च ज झ ञ ण त थ ध न प फ ब भ म य ल व श ष स क्ष त्र ज्ञ
• बिना खड़ी पाई के साथ-
ङ छ ट ठ ड ढ द र

व्यंजन के प्रकार

• हिंदी वर्णमाला (Hindi Varnmala/Alphabet) में व्यंजन निम्न प्रकार के होते हैं।


1 स्पर्श व्यंजन

2 अन्तस्थ व्यंजन

3 ऊष्म व्यंजन

संयुक्त व्यंजन- क्ष, त्र, ज्ञ, श्र

5 अयोगवाह- अं, अ:

6 उछिप्त/द्विगुण- ढ़, ड़

• जिन व्यंजनों का उच्चारण करते समय हवा फेफड़ो से निकलते हुए किसी विशेष स्थान (कण्ठ्य,तालु,मूर्धा,दन्त एवं ओष्ठ) को स्पर्श करे ,स्पर्श व्यंजन कहलाते है। 

वर्ण विभाग- हिन्दी वर्ण, वर्णमाला, परिभाषा, भेद और उदाहरण Varn vibhaag, hindi varnmaala


जैसे –


 व्यंजन – वर्ग 

  1. क ख ग घ ङ – क
  2. च छ ज झ ञ – च
  3. ट ठ ड ढ ण -  ट
  4. त थ द ध न – त 
  5. प फ ब भ म – प

Hindi Varnmala (वर्णमाला) में स्पर्श व्यंजन की कुल संख्या 25 है।


अन्तस्थ व्यंजन –

जिन वर्णो का उच्चारण वर्णमाला के बीच (स्वर एवं व्यंजन के मध्य) स्थित हो ,अन्तस्थ व्यंजन कहलाते है।

जैसे – अन्तस्थ व्यंजन – य र ल व 


 उष्म/संघर्षी व्यंजन –

जिन व्यंजनों के उच्चारण में हवा मुख में घर्षण /रगड़ती हुई महसूस हो ,उसे उष्म/संघर्षी व्यंजन कहते है।

जैसे – उष्म/संघर्षी व्यंजन – श ष स ह 


व्यंजन का वर्गीकरण

Hindi Varnmala में उच्चारण स्थान के आधार पर व्यंजन का वर्गीकरण निम्न है –


• कण्ठ्य – क ख ग घ ङ ह

• तालव्य – च छ ज झ ञ य श

• मूर्धन्य – ट ठ ड ढ ण ष र

दन्त्यत थ द ध न ल स

• ओष्ठ्य प फ ब भ म

• दन्तोष्ठ

• अनुनासिक – ङ ञ ण न म 

अघोष- 

Hindi Varnmala के स्पर्श व्यंजन के प्रत्येक वर्ग (क च ट त प) के प्रथम एवं द्वितीय व्यंजन, अघोष व्यंजन कहलाते है।जैसे – क ख च छ ट ठ त थ प फ


घोष- 

प्रत्येक वर्ग के तृतीय, चतुर्थ एवं पंचम व्यंजन, घोष व्यंजन कहलाते है। जैसे- ग घ ङ ज झ ञ ड ढ ण द ध न ब भ म


अल्पप्राण

प्रत्येक वर्ग के प्रथम , तृतीय , पंचम व्यंजन ,अल्पप्राण व्यंजन कहलाते है। जैसे – क ग ङ च ज ञ ट ड ण त द न प ब म


महाप्राण

प्रत्येक वर्ग के द्वितीय एवं चतुर्थ व्यंजन, महाप्राण व्यंजन कहलाते है। जैसे – ख घ छ झ ठ ढ थ ध फ भ

FAQ

1 हिन्दी वर्णमाला में कितने वर्ण होते हैं?

वर्णों को व्यवस्थित करने के समूह को वर्णमाला कहते हैं। हिन्दी में उच्चारण के आधार पर 52 वर्ण होते हैं। इनमें 11 स्वर और 41 व्यंजन होते हैं। 


2 हिंदी में कुल कितने व्यंजन है?

हिंदी में कुल 39 व्यंजन होते हैं, जिसमें 33 व्यंजन मानक हिंदी व्यंजन होते हैं, चार संयुक्त व्यंजन (क्ष, त्र, ज्ञ, श्र ) होते हैं और दो उत्क्षिप्त व्यंजन होते हैं।


3 क से ज्ञ तक कितने अक्षर होते हैं?

क से तक ज्ञ 36 अक्षर होते हैं।

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